10 अगस्त को सावन सोमवार और सोम प्रदोष का शुभ संयोग है। जानें त्रयोदशी तिथि, पूजा मुहूर्त और भगवान शिव की आराधना का महत्व।

भोपाल। सावन वाला महीना, भगवान शिव की आराधना के लिए काफी पवित्र माना जाता है, और ये बात कई जगह पर लोग कहते भी रहते है। इसी दौर में सोमवार, मासिक शिवरात्रि , और प्रदोष व्रत का अलग ही महत्व जुड़ा रहता है। इस बार 10 अगस्त 2026 को सावन का पहला प्रदोष व्रत और दूसरा सावन सोमवार एक ही दिन, यानि एक ही खींच में आ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से ये तरह का दुर्लभ संयोग शिव भक्तों के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि जो लोग इस दिन विधि-विधान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं उन्हें खास कृपा मिलती है, और जीवन की कई उलझनें कम होने लगती हैं।
पंचांग के मुताबिक सावन माह का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026, सोमवार को पड़ रहा है। क्योंकि ये सोमवार के दिन ही आ रहा है, इसलिए इसे “सोम प्रदोष व्रत” कहा जाता है। लोगों की आस्था ये भी कहती है कि सावन सोमवार और सोम प्रदोष का ये संयोग, दोनों व्रतों का पुण्य फल एक साथ देने वाला माना जाता है।
त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त सुबह 8:00 बजे से शुरू होकर 11 अगस्त सुबह 4:54 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का शुभ समय शाम 7:09 बजे से रात 9:23 बजे तक रखा गया है। इसके साथ ही ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:49 बजे से 5:34 बजे और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:18 बजे से 1:09 बजे तक रहेगा, बस ध्यान रहे समय स्थानीय पंचांग अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सोम प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है। ये व्रत मानसिक सुकून, वैवाहिक खुशहाली, पारिवारिक समृद्धि और मनोकामना पूरी होने के लिए बहुत फलदायी माना जाता है। ऐसी भी बात कही जाती है कि जिनके जन्म-लक्षण में चंद्र दोष है, उनके लिए ये व्रत खास तौर पर सहायक होता है, और शिव पूजा से चंद्र दोष के असर घटने की बात कही जाती है।
इस दुर्लभ मेल में, सावन सोमवार और सोम प्रदोष साथ पड़ने के कारण शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, और रुद्राभिषेक की तैयारी ज्यादा दिखेगी। श्रद्धालु भोलेनाथ का अभिषेक, शिव चालीसा का पाठ और मंत्र जाप करके शिव की कृपा पाने का प्रयास करेंगे। कुल मिलाकर धार्मिक दृष्टि से ये दिन सावन के सबसे महत्वपूर्ण और शुभ आयोजनों में गिना जा रहा है।
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