भोपाल स्थित मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल कार्यालय के बाहर 8 अगस्त से धरने पर बैठे NSO छात्रों के दबाव में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। रजिस्ट्रार मुकेश सिंह को पद से हटा दिया गया है, लेकिन GNM, BSc परिणाम और FMS की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है।

भोपाल के छात्रों और शिक्षा जगत के लिए आज की ये सबसे बड़ी खबर मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल वाले मामले से ही जुड़ी है। नर्सिंग परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और रिजल्ट जारी होने में जो भारी देरी हो रही है ना, उसपर आखिरकार राज्य सरकार ने डंडा चल ही दिया। सूबे के डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के सख्त निर्देश के बाद नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार मुकेश सिंह को उनके पद से हटा दिया गया। रजिस्ट्रार के हटाए जाने की बात फैलते ही भोपाल स्थित कार्यालय के बाहर ,और शहर भर के नर्सिंग छात्रों के बीच हलचल, काफी तेज़ हो गई।
ये सब उस आंदोलन का नतीजा माना जा रहा है जिसने राजधानी भोपाल का पारा चढ़ा रखा है। नर्सिंग छात्र संगठन, यानी NSO के सदस्य 8 अगस्त से ही मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल कार्यालय के बाहर अपना तंबू गाड़ कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। इन छात्रों का सीधा आरोप है कि परीक्षा और रिजल्ट में लगातार देरी की वजह से उनका पूरा शैक्षणिक सत्र बर्बाद हो रहा है। कई विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई, जरूरी इंटर्नशिप और भोपाल व दूसरे शहरों में रोजगार के मौके, सब कुछ एक रिजल्ट का इंतजार बनकर रह गया है।
धरना स्थल पर मौजूद छात्रों की सबसे बड़ी मांग ये है कि सभी लंबित GNM छात्रों के परिणाम तुरंत घोषित किए जाएं, और आगामी परीक्षाओं का पूरा कार्यक्रम समय पर जारी किया जाए। साथ ही, BSc Nursing के विद्यार्थियों ने भी अपने लंबित रिजल्ट निकालने और अगली परीक्षाएं तय समय में कराने की मांग को लेकर जोर दिया है। उनका कहना है कि रिजल्ट में इस तरह की देरी से उनका पूरा शैक्षणिक शेड्यूल बुरी तरह बिगड़ रहा है।
राजधानी भोपाल में धरना दे रहे छात्रों ने छात्रवृत्ति को लेकर भी गहरी नाराज़गी जताई है। उन्होंने मांग की है कि SC, ST और OBC वर्ग के विद्यार्थियों के साथ साथ EWS और सामान्य वर्ग के पात्र छात्रों को भी बिना किसी देरी के छात्रवृत्ति मिले। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को समय पर पैसा न मिलने से पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाता है। छात्रों ने सरकार से छात्रवृत्ति की प्रक्रिया को आसान करने और समयबद्ध तरीके से कराने की अपील भी की है।
स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक ढांचे को थोड़ा और सुदृढ़ करने के लिए प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि सभी नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थान, जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के साथ संबद्ध किए जाएं। उनका तर्क है कि इससे परीक्षाओं में बेहतर समन्वय बनेगा। इसके अलावा कॉलेजों में ‘Faculty Management System’ यानी FMS लागू करने की भी सख्त मांग की गई है, ताकि फैकल्टी की जानकारी और शैक्षणिक व्यवस्था में भोपाल समेत पूरे प्रदेश में अधिक पारदर्शिता आ सके।
हालांकि छात्रों के दबाव में आकर रजिस्ट्रार को हटा दिया गया, लेकिन भोपाल में चल रहा ये आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। छात्रों का कहना है कि सिर्फ रजिस्ट्रार को हटाना उनकी तमाम समस्याओं का पूरा समाधान नहीं है। वे परीक्षा और रिजल्ट प्रक्रिया में पूर्ण सुधार के साथ सभी लंबित परिणाम जल्द जारी करने की मांग पर डटे हुए हैं। छात्रों ने सरकार और नर्सिंग काउंसिल से अपनी सभी शर्तों पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। अब भोपाल के छात्रों की नजरें सरकार और काउंसिल के अगले कदम पर टिकी हैं।
राजधानी भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में नए सत्र के लिए ‘अभ्युदय 2026’ का शानदार आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीयूष मिश्रा समेत 50 हस्तियों की मौजूदगी में छात्रों को पत्रकारिता और नई तकनीक का बड़ा संदेश दिया।
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने MP TET 2026 का शेड्यूल जारी कर दिया है। 1998 से 2009 के बीच नियुक्त लगभग 1.5 लाख स्थानीय शिक्षकों को यह परीक्षा पास करनी होगी। 12 अक्टूबर को होने वाली इस परीक्षा में 150 प्रश्न पूछे जाएंगे।
भोपालवासियों के लिए आज का दिन वीआईपी मूवमेंट से भरा रहेगा। सीएम डॉ. मोहन यादव राजधानी में 'अभ्युदय 2026' और रविदास यात्रा में शामिल होंगे। वहीं, गुना और कैलारस-सबलगढ़-वीरपुर के स्थानीय लोगों को कृषि महोत्सव और मेमू ट्रेन की वर्चुअल सौगात मिलेगी।
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